• आबादी नियंत्रण – देश में व्याप्त भ्रष्टाचार, महँगाई और बेरोजगारी का एक सबसे बड़ा कारण तीव्र गति से देश की बढती आबादी भी है । यदि इसे समय रहते नियंत्रित करने का कोई ठोस नहीं निकाला गया तो देश के विकास के सारे के सारे फार्मूला धरे रह जायेंगे ।
  • विदेशी घुसपैठ – विदेशी नागरिको को रोकने के लिए तथा उन्हें ढूँढ कर स्वदेश भेजने के लिए यदि कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो राष्ट्र के विकास के सभी फार्मूले में पलीता लगते चले जायेंगे ।
  • बाढ और सूखा – देश के आबादी के 55 प्रतिशत लोग किसान है । लगभग 50% किसान सालोभर बाढ़ या सूखा जैसी समस्या से जूझते जूझते अपना दम तोड़ देते हैं । जिससे शहरो पर अप्रत्याशित रूप से बोझ पड़ता है जो शहरो के विकास व्यवस्था को चरमरा कर रख देती है । अतः किसानो को उसके फसल की सुरक्षा की गारंटी के लिए सरकार को भारतवर्ष के सम्पूर्ण नदियों को नहरों के माध्यम से जोड़ देना चाहिये।
  • आवासीय जमीनों कि गारंटी – भारत में आज भी ऐसे राजा महाराजा है जिनके पास सैकड़ों एकड़ जमीन है तथा कुछ लोग ऐसे हैं जिन्हे रहने के लिए जमीन नहीं है जो देश में नक्सलवाद जैसी समस्या को जन्म देती है । अतः देश के एक एक नागरिक को आवास के लिए जमीन अथवा आवास की गारंटी सरकार की ओर से मिलनी चाहिए ।
  • स्वाधीनता का अधिकार – आदमी स्वाधीन तभी हो सकता है जब उसके आवास पर कोई टैक्स नहीं लगता हो । अतः कम से कम 100 वर्ग गज आवासीय जमीन पर नगरनिगम द्वारा टैक्स नहीं लिया जाये । अर्थात 100 वर्ग गज तक के आवासीय जमीन जिसपर मकान बना हो संपत्ति कर से मुक्त होना चाहिए । न्यूनतम आवासीय जमीन पर टैक्स लगाना अंग्रेजो की देन है स्वाधीन देश में ऐसा नहीं चाहिए।
  • हिंदी में बहस हो – हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट आज भी अंग्रेजी प्रथा को ढो रही है यहाँ पर हिंदी में बहस नहीं होती । देश के आम लोग जिन्हे अंग्रेजी नहीं आती अपनी मुकदमा सुनने से वंचित रह जाते है । अतः देश के हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई / कार्यवाही हिंदी में अथवा प्रार्थी /के प्रांतीय भाषा में भी होनी चाहिए।
  • टैक्स नीति में सुधार – सरकार अपनी गलत टैक्स नीति और फ़िज़ूल खर्ची के कारण काफी नुकसान झेल रही है और इसका बोझ सरकार, देश की भोली भाली जनता पर लादती है । स्वाधीन देश के जनता के साथ अन्याय है । १२ प्रतिशत, २० प्रतिशत , 30 प्रतिशत , और ४० प्रतिशत टैक्स ये सब अंग्रेजों द्वारा जनता को लूटने का एक टोटका है । टैक्स के नाम पर यह जन विरोधी सरकार ने लूट मचा रखी है । देश आजाद होने के बाद लोगो ने यह कभी नहीं सोचा होगा कि स्वाधीन भारत में अंग्रेजों से भी चार गुना बढाकर टैक्स लिया जायेगा यही कारण है देश में काले धन को बढ़ावा मिलता है । इतना टैक्स तो अंग्रे़जी सरकार भी नहीं लिया करती थी । महंगाई का एक बहुत बड़ा कारण टैक्स भी होता है । कदम कदम पर टैक्स – रोड टैक्स, टोल टैक्स , मनोरंजन टैक्स , सम्पति टैक्स, सेवा टैक्स , उत्पाद टैक्स , सीमा टैक्स, सेल टैक्स और आय टैक्स एक ईमानदार आदमी को चोर बनने पर मजबूर करती है । इन साड़ी परिस्थितियो को देखने से लगता नहीं है कि आज हमारा देश स्वाधीन है । अपनी गलत टैक्स निति के कारण जहाँ एक ओर सरकार देश के काले धन के सार्थक उपयोग से वंचित हो जाती है । वही विदेशी सरकार हमारा काला धन हमें ही ब्याज पर देती है । गलत टैक्स प्रणाली के वजह से हमारे देश के सैकड़ों व्यवसायी प्रति वर्ष मुंह को खाते है । वही दूसरी ओर भ्रष्ट लोग प्रतिवर्ष सरकार को अरबो रुपये का चुना लगाते हैं । सच तो यह है कि स्वाधीन देश में टैक्स नाम कि चीज नहीं होनी चाहिए क्योकि टैक्स देने वाली जनता स्वाधीन नहीं रह जाती । स्वाधीन देश के सरकार को देश चलाने के लिए जनता के ऊपर थोपा हुआ टैक्स की जरूरत नहीं होना चाहिए बल्कि जनता से माँगा हुआ चंदा की जरूरत होनी चाहिए । जहाँ 5 प्रतिशत तक के टैक्स को आम जनता चंदा के रूप में या अपना योगदान राशि के रूप में ख़ुशी ख़ुशी दे सकती है । वही 5 प्रतिशत से ऊपर लिया गया टैक्स है अपने स्वाधीनता के ऊपर ठोका हुआ गुलामी की बेड़ी समझते है । इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह देशी है या विदेशी । यदि जनता से लिया गया योगदान राशि से सरकार का खर्च पूरा नहीं होता तो सरकार को अपनी नवाबी ठाट बाट में कमी करनी चाहिए । अपनी सरकारी प्रतिष्ठान और व्यवसाय को मुनाफे में चलाने के लिए जनता के प्रति वचनबद्ध होना चाहिए न कि मुनाफे में चलने वाली सरकारी प्रतिष्ठानो को पूंजीपतियो के हाथों कौरी के भाव में बेच कर मस्ती करे तथा जनता पर अनावश्यक टैक्स ठोक कर वोट बैंक के लिए खैरात बांटे ।
  • नगर निगम नियामक बोर्ड – सभी शहरो में एक नियामक बोर्ड का गठन किया जाये जो शहरों की सडको की खुदाई पर शहर के विकास के लिए कार्यरत सभी सरकारी और गैर सरकारी संगठनो के बीच ऐसी तालमेल बनाये जो शहरों के अंदर सड़कों का अनावश्यक तोड़ फोड़ को नियंत्रित करे ।
  • दलितों का हक़ – अक्सर देखा जाता है कि चार चार बार विधायक रहने के बाद , सांसद रहने के बाद , मंत्री रहने के बाद भी लोग अपने को दलित बताकर दलितों के लिए आरक्षित सीट से खड़ा हो कर देश के वास्तविक दलितो के विकास के रास्ते में रोड़ा अटका देते है तथा अपना उल्लू सीधा करते है। इनके खिलाफ कोई बोलने कि हिम्मत नहीं करता। अतः ऐसे देश के माफियायों को प्रतिबंधित कर देश के वास्तविक दलितों को उसका हक़ दिलाया जाये।
  • आय से अधिक सम्पत्ति के मामले – ऐसे मामले से निपटने के लिए जो कानून बना है प्रायः देखा जाता है सत्तारूढ़ दल इस कानून का इस्तेमाल अपने प्रतिद्वंदियों के खिलाफ करते आये हैं । अतः इसका दुरूपयोग रोकने के लिए इस कानून में संसोधन किया जाये । इस कानून को थोडा नरम किया जाये तथा लोगो को तब तक गिरफ्तार नहीं किया जाये जब तक वो कोर्ट द्वारा दोषी नहीं ठहरा दिया जाता ।
  • भ्रष्टाचार – इसके लिए निगरानी विभागो को जवाबदेह बनाया जायेगा तथा भ्रष्टाचार में लिप्त लोगो को कड़ी से कड़ी सजा की व्यवस्था की जायेगी ताकि दूसरे व्यक्ति ऐसी गलती करने की कोशिश ना करे ।
  • निजी जमीनों की मान्यता सरकारी एजेंसी द्वारा न किया जाये – ज्यादातर राज्यो में आवासीय या खेती की जमीनों को सरकार द्वारा एक उच्च मूल्य फिक्स कर दिया जाता है जो जमीन की वास्तविक मूल्यो से कई गुना ज्यादा होता है और इस प्रकार आम लोगो को जमीन बेचने या खरीदने के समय अनावश्यक टैक्स देना पड़ता है । कुछ निबंधन कार्यालय में जमीनो कि फिक्स मूल्य को पुर्नमूल्यांकन के लिए जो अधिकारी बैठे हैं वो जमीन पुर्नमूल्यांकन के लिए जनता को घुस देने पर मजबूर करते है । अतः जमीन मान्यता का काम या तो ग्राम पंचायतो के हाथ में दी जाये या खरीद बिक्री करनेवालों के खुद के हाथ में होनी चाहिए ।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थय शिक्षा और बिजली – का समुचित प्रबंध करना – ग्रामीण क्षेत्रो में स्वास्थय शिक्षा और बिजली का समुचित प्रबंध न होने के कारण आज लोग तीव्र गति से शहरो की तरफ पलायन कर रहे हैं जिससे शहर की व्यवस्था चरमरा जाती है और इस प्रकार लगातार तीव्र गति से शहरो की आबादी बढ़ने से शहरो में बढ़ती कुव्यवस्था पर सरकार नियंत्रण संतोषजनक तरीके से नहीं कर पाती । अतः ग्रामीण इलाकों की समुचित विकास किये बगैर शहरो का तमाम विकास अधूरा माना जायेगा ।
  • लोकतंत्र में लोकसेवक का पदनाम में अधिकारी लगाने के बजाय जनसेवक लगाया जाय ताकि लोकसेवक को अपने दायित्वो का एहसास रहे और जनता को भी यह एहसास हो कि वह प्रजा नहीं बल्कि राजा है । जैसे जिलाधिकारी का पदनाम जिला जनसेवक रखा जाये ।
  • देश के घर घर में शौचालय कि व्यवस्था कि अनिवार्ययता ।
  • साथ-साथ रेल मंत्रालय से अनुरोध है कि वे रेलवे के उस (ब्रिटिश ज़माने के) अधिकार को निरस्त कर दे जिसमे रेलवे, परिस्थितिवश बे टिकट यात्रियों को सश्रम तीन माह कैद की निर्मम सजा सुनाता है।